सक्षम अधिकारी निर्णय क्यों रोक देते हैं, और तेज़ राज्य कैसे बने। फ़ाइल पूरी है, नियम साफ़ है — फिर भी दस्तख़त नहीं होते। उसी चुप्पी की क़ीमत का हिसाब।
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हरियाणा के 41वें पुलिस महानिदेशक · भारतीय पुलिस सेवा, 1992–2025
तैंतीस साल राज्य के भीतर से काम देखा। अब लिखता हूँ — व्यवस्था असल में कैसे टिकती है, और फ़ैसले क्यों रुक जाते हैं।
कल भारत में सात अरब काम ग़लत नहीं हुए। व्यवस्था जब काम करती है, दिखती नहीं — और तैंतीस साल मेरा काम ही यही था: जो बिगड़ा, उसे गिनना।
सक्षम अधिकारी निर्णय क्यों रोक देते हैं, और तेज़ राज्य कैसे बने। फ़ाइल पूरी है, नियम साफ़ है — फिर भी दस्तख़त नहीं होते। उसी चुप्पी की क़ीमत का हिसाब।
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एक युवा, सम्बद्ध भारत की पुलिसिंग। डंडे से नहीं, सहमति से टिकने वाली व्यवस्था — पाँच स्तंभ, एक दशक का एजेंडा।
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स्मार्टफ़ोन, प्रदर्शन, और अमन क़ायम रखने का नया तरीक़ा। आज हर भीड़ के हाथ में कैमरा है — डंडा चलाना अब हारने का सबसे पक्का रास्ता है।
किताब का पन्ना (अंग्रेज़ी) ›बाक़ी औज़ारों के हिन्दी संस्करण की तैयारी चल रही है।